Friday, May 9, 2008

पीपलवाला भूत (सत्य कथा)


बात उन दिनों की है जब हर गाँव, बाग-बगीचों में भूत-प्रेतों का साम्राज्य था। गाँवों के अगल-बगल में पेड़-पौधों, झाड़-झंखाड़ों, बागों (महुआनी, आमवारी, बँसवारी आदि) की बहुलता हुआ करती थी । एक गाँव से दूसरे गाँव में जाने के लिए पगडंडियों से होकर जाना पड़ता था। कमजोर लोग खरखर दुपहरिया या दिन डूबने के बाद भूत-प्रेत के डर से गाँव के बाहर जाने में घबराते थे या जाते भी थे तो दल बनाकर। हिम्मती आदमी दल का नेतृत्व करता था और बार-बार अपने सहगमन-साथियों को चेताया करता था कि मुड़कर पीछे मत देखो। जय हनुमान की दुहाई देते हुए आगे बढ़ो।
उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में सोखाओं की तूँती बोलती थी और किसी के बीमार पड़ने पर या तो लोग खरबिरउआ दवाई से काम चला लेते थे नहीं तो सोखाओं की शरण में चले जाते थे। तो आइए अब आप को उसी समय की एक भूतही घटना सुनाता हूँ-
हमारे गाँव के एक बाबूसाहब पेटगड़ी (पेट का दर्द) से परेशान थे । उनकी पेटगड़ी इतनी बड़ गई कि उनके जान की बन गई। बहुत सारी खरविरउआ दवाई कराई गई; मन्नतें माँगी गई, ओझाओं-सोखाओं को अद्धा, पौवा के साथ ही साथ भाँग-गाँजा और मुर्गे, खोंसू (बकरा) भी भेंट किए गए पर पेटगड़ी टस से मस नहीं हुई। उसी समय हमारे गाँव में कोई महात्मा पधारे थे और उन्होनें सलाह दी कि अगर बाबूसाहब को सौ साल पुराना सिरका पिला दिया जाए तो पेटगड़ी छू-मंतर हो जाएगी। अब क्या था, बाबूसाहब के घरवाले, गाँव-गड़ा, हितनात सब लोग सौ साल पुराने सिरके की तलाश में जुट गए। तभी कहीं से पता चला कि पास के गाँव सिधावें में किसी के वहाँ सौ साल पुराना सिरका है।
अब सिरका लाने का बीड़ा बाबूसाहब के ही एक लँगोटिया यार श्री खेलावन अहिर ने उठा लिया । साम के समय खेलावन यादव सिरका लाने के लिए सिधावें गाँव में गए। (सिधावें हमारे गाँव से लगभग एक कोस पर है) खेलावन यादव सिरका लेकर जिस रास्ते से चले उसी रास्ते में एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ था और उसपर एक नामी भूत रहता था। उसका खौफ इतना था कि वहाँ बराबर लोग जेवनार चढ़ाया करते थे ताकि वह उनका अहित न कर दे। अरे यहाँ तक कि वहाँ से गुजरनेवाला कोई भी व्यक्ति यदि अंजाने में सुर्ती बनाकर थोंक दिया तो वह भूत ताली की आवाज को ललकार समझ बैठता था और आकर उस व्यक्ति को पटक देता था। लोग वहाँ सुर्ती, गाँजा, भाँग आदि चढ़ाया करते थे।
अभी खेलावन अहिर उस पीपल के पेड़ से थोड़ी दूर ही थे तब तक सिरके की गंध से वह भूत बेचैन हो गया और सिरके को पाने के लिए खेलावन अहिर के पीछे पड़ गया। खेलावन अहिर भी बहुत ही निडर और बहादुर आदमी थे, उन्होंने भूत को सिरका देने की अपेक्षा पंगा लेना ही उचित समझा। दोनों में धरा-धरउअल, पटका-पटकी शुरु हो गई। भूत कहता था कि थोड़ा-सा ही दो लेकिन दो। पर खेलावन अहिर कहते थे कि एक ठोप (बूँद) नहीं दूँगा; तूझे जो करना है कर ले। अब भूत अपने असली रूप में आ गया और लगा उठा उठाकर खेलावन यादव को पटकने पर खेलावन यादव ने भी ठान ली थी कि सिरका नहीं देना है तो नहीं देना है। पटका-पटकी करते हुए खेलावन अहिर गाँव के पास आ गए पर भूत ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और वहीं एक छोटे से गढ़हे में ले जाकर लगा उनको गाड़ने। अब उस भूत का साथ देने के लिए एक बुढ़ुआ (जो आदमी पानी में डूबकर मरा हो) जो वहीं पास की पोखरी में रहता था आ गया था। अब तो खेलावन यादव कमजोर पड़ने लगे। तभी क्या हुआ कि गाँव के कुछ लोग खेलावन यादव की तलाश में उधर ही आ गए तब जाकर खेलावन यादव की जान बची।
दो-तीन बार सिरका पीने से बाबूसाहब की पेटगड़ी तो एक-दो दिन में छू-मंतर हो गई पर खेलावन अहिर को वह पीपलवाला भूत बकसा नहीं अपितु उन्हें खेलाने लगा। बाबूसाहब ताजा सिरका बनवाकर और सूर्ती, भाँग आदि ले जाकर उस पीपल के पेड़ के नीचे चढ़ाए और उस भूत को यह भी वचन दिया कि साल में दो बार वे जेवनार भी चढ़ाएँगे पर तुम मेरे लँगोटिया यार (खेलावन यादव) को बकस दो। पीपलवाले भूत ने खेलावन यादव को तो बकस दिया पर जबतक बाबूसाहब थे तबतक वे साल में दो बार उस पीपल के पेड़ के नीचे जेवनार जरूर चढ़ाया करते थे।
उस पीपल के पेड़ को गिरे लगभग 20-25 साल हो गए हैं और वहीं से होकर एक पक्की सड़क भी जाती है पर अब वह भूत और वह पीपल केवल उन पुरनिया लोगों के जेहन में है जिनका पाला उस भूत से पड़ा।
सिरका चाहें आम का हो या कटहल का या किसी अन्य फल का पर यह वास्तव में पेट के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है और जितना पुराना होगा उतना ही बढ़िया ।

-प्रभाकर पाण्डेय

62 comments:

PD said...

मस्त भूतिया कहानी थी..
लिखते रहें.. मैं भूत-भगवान को तो नहीं मानता हूँ मगर उनकी कहानी अच्छी जरूर लगती है..
और कृपया ये वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें.. :)

Udan Tashtari said...

ऐसा न डरवाओ भाई कि लोग यहाँ आना ही छोड़ दें. :)

मस्त है.

-----------------------------------
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.

एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.

यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.

शुभकामनाऐं.

समीर लाल
(उड़न तश्तरी)

sahebali said...

कहानी अच्छी लगी, लिखो खुब लिखो विभिन्न विषयों पर लिखो हमे इस ज़ाल पर हिन्दी का जाल बिछाना है। अच्छा विषय चुना है आपने,
धन्यवाद सहित
साहेब अली

योगेन्द्र मौदगिल said...

jai ho, bas aap hi ki kami thi. aapko pa liya. main dhanya hoon. milte hi raha karenge. bas jara sameer g se bacha kar rakhiyega bhooton ko. pata nahi aapko hanumaan jayanti wala kissa pata hai ki nahi. khair...
Jai Hanuman Gyan Gun Saagar......

Bhupendra Raghav said...

भाई जी आपके गाँव से और भूत से रूबरू हुआ..
मस्त एक दम..

बहुत बढिया रहा आपके ब्लोग का भ्रमण और ये जो चित्र है सच में अपना गाँव याद आ गया..

बहुत बहुत बधाई..

khursheed said...

bhaiya hume aapki kahani bahut achhi lagi.........
aise hi kahaniya likhte rahiye...........

Manish said...

is this truth
how to talk with ghost please tll me
my id is Sainwar@gmail.com

veer said...

mast bhoot ki kahani thi

vikash said...

यार ....साइबर कैफे का एक घंटा तो तुम्हारी कहानिया पढने में ही लग गया | रात भी हो गयी है |
घर कैसे जाऊ ? हनुमान चालीसा तो लाया ही नहीं हूँ |

Anji said...

aap ki sari kahaniya mast hai par, prabhakar bhai,pahale aap mujhe ye bataiye,ki aap hai kaha se ?-Anjani Gupta( Austria)guptanji@yahoo.com

Anji said...

aap ki sari kahaniya mast hai !par pravakar ji aap hai kaha se ? ye jarur bataiyega !
Anjani Gupta (Austria)
guptanji@

Rutuja said...

hame to ye bohat pasand aagai..
hame pehle se hi bhootonka bohat matlab bohat shuck hai... muze bhootonki kahani bohat pasand hai.....

Sanjay Saroj said...

Vaise jitni bhi aapki kahani hai lagbhag sab maine padhi hai achhi kahani hai, aise hi likhte rahiye

nitin said...

bekar hai raat me to mai ese 100 bat aakele par sakra hoon

ANKIT KUMAR said...

वाह@ भाई आपके भी क्या कहने मुझे भी भूत और भगवान पर यकीन है और आप पर भी सच मेँ भूत होता है हमारे बुजुर्ग लोग भी कहते हैँ इसलिए

RANJEET said...

kahani bahut achhi lagi bas likhte rahiye
RANJEET KUMAR

Anshuman said...

बहुत अच्छा मित्रवर, शानदार ब्लॉग है। मैं अपने कुछ और मित्रों को भी इसे पढ़ने के लिए प्रेरित किया और उन लोगों ने भी इसे खूब पसंद किया। अच्छा लिखते हैं, ऐसे ही लिखते रहिए। अपने गांव जवार की याद ताजा हो जाती है। लेकिन नई पोस्ट थोड़ी जल्दी डाला करिए।

अंशुमान

ashok kumar said...

कहानी अच्छी लगी, लिखो खुब लिखो

abhilash said...

bakwas or pakau

abhilash said...

pakaau or bakwas

sandeep mane said...

apki kahani itni khas nahi hai aur ek bat hamesha yad rakhana bhoot kisi ko bhi maph nahi karta
sandeep mane

Anonymous said...

mast story hai,mere par b ek br pathro ki barsaat ki hai bhut ne.shyd aapko jhuth lge.

Saidul Islam said...

mast he biru...

Anonymous said...

Are bhai khani acchi hai log coment kar mai nahi pad saka hindi samjh ati hai lekin padna nahi ata hindi ke alfaz english me likiye

Anonymous said...

Are bhai khani acchi hai log coment kar mai nahi pad saka hindi samjh ati hai lekin padna nahi ata hindi ke alfaz english me likiye

swapnil said...

Kahani to thik hai hi lekin esase bhi thik esme prayukt kahi-2 purvi u.p.ki (bhojpuri) bhasha lagi.sach me gaon ki yad dila di aapne.bahut achha likha hai aapne.

Mani Shankar said...

Aur bhayanak kahani likho ye kahani kucch bhi nahi hai

Mani Shankar said...

Kahani mai jaan nahi hai

goldi said...

has has k pagal hogayA ME TO kya comedy kahani thi ha ha ha

vinod modgill said...

Yar darr to tha nai isme bhut khanni kaise ho gyi ye to aise lgta hai jaise sirke ki add ki ho

Anonymous said...

SAMAJH NAHI AATA KI DUNIYA ME KAHANIYA JYAADA HAI YA INSAAN KITABO KE SHOK ME HUM SAB KUCH PADH LETE HAI LEKIN KABHI UNKA LOGIC NAHI SAMJHTE JASA KI IS KAHANI SE PATA CHALTA HAI KI JEEVAN ME KUCH GHTANAYE HANSE KE LIYE HOTI HAI KUCHSAMAJHNE KE LIYE AUR YE GHATNA EK UDAHRAN HAI DOSTI KA APNE MITRA KE PRATI KARTVAY KA THANK U

Anonymous said...

Bahut bahut dhanyawad

Anonymous said...

aapki khani bahut acchi thi bas thohra dar lag raha hai ki kahi aapki kahani se bhoot na nikal jaye,
lekin aapki kahani zaroor pahrunga.
meri yahi prathna hai Ki aap aise hi kahaniyn likhte rahe.
aur hum parhtein rahein.
Humari shubhkamnaye aapke sath hain.
bahgwaan aapko lahmbi umar de.
danyabaad

sachin desai said...

bhai hamko to pasand aa gayi ye kahani,but jisko pasand nahi aayi wo esko bakwas or faltu nahi kah sakte kyu ki har kisi ko kahani likhna nahi aata but comment karna sabko aata hai..........and thank writter saheb

Anonymous said...

Nice story

raghu rana said...

Hello anju

raghu rana said...

Bhut achi khani thi maine v vastaw mai aatmaon ko dekha hai mai uttrakhand ka rhne wala hon UTTAKASHI
GANGOTRY mNBr 9729240054

raghu rana said...

Hello anju jee

raghu rana said...

Hello

Anonymous said...

Great story

Anonymous said...

Nice & horror, gd hai

Ankit Sharma said...

Nice story bhai

Ankit Sharma said...

Nice story

govind sharma said...

mast kahani vai

Anonymous said...

IT'S WONDERFUL NICE HORROR STORY BEST OF LUCK

Anonymous said...

IT'S WONDERFUL NICE HORROR STORY BEST OF LUCK

Anonymous said...

IT'S WONDERFUL NICE HORROR STORY BEST OF LUCK

Anonymous said...

M, BFYGHGVB B C5EE

Anonymous said...

Apoorv Chintu
Very nice but story is not Full So plz Fillup ok .........

Anonymous said...

ITIL is absolutely coming to be moгe important in todау's IT companies around the globe. Many thanks for this post, it has actually been a good read and I have actually found it interesting. I question how well ITIL is being observed by the various businesses at presents? I know that, in my encounter, it does not always go 100 % to plan - but thats the reason Itil is only a structure I suspect. It leaves some parts for analysis of the adopter which is where at times points go a little bit of wrong.

Look at my web blog itil v4 training

koushal kumar said...

Nice story......

devendra yadav said...

Nice story.

jeet said...

badiya kahani hai .....

sevak meena said...

Im sevak meena mast kajani hai

kailash joshi said...

mujhe to kahani kuchha khas daravani nahi lagi.

kailash joshi said...

mujhe to kahani kuchha khas daravani nahi lagi.

Anirudh Sha said...

kuch aur khatarnak wali khani likho

Ajay Tyagi said...

कहानी
रोचक है मुझे भुतो की कहानी अचछी लगती है

Vimlesh Pandey said...

kahani me sirke ka mahatv bataya hai

rastrawadi musalmaan said...

agar ye khani sach hai to ye mere gaon ki hi khani hai
or sirka bhi mere gaon se laya gya tha....

Sanjay Rajput said...

Very nice story yaar padhne me maja a
Gaya realy

sunil kumawat said...

nice story or ye kahani bhi bahot horror thi yr